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नाषणल मलटी कमोडिटी एक्सचेन्ज ओफ इन्ड्या लिमिटेड
INTRODUCTION
National Multi-Commodity Exchange of India Limited is committed to provide world class services of on-line screen based Futures Trading of permitted commodities and efficient Clearing and guaranteed settlement, while complying with Statutory/ Regulatory requirements. We shall strive to ensure continual improvement of customer services and remain quality leader amongst all commodity exchanges.NMCE has many firsts to its credit – the first, online, demutualised, multi-commodity exchange in the country to get national status. We are the one and only one Commodity Bourse in the world to obtain the prestigious ISO 9001:2000 certification awarded by the British Standard Institutions (BSI). NMCE not only revived futures trade electronically in the commodities in India after a gap of 41 years, but also integrated the centuries old commodity market with the latest technology. It is backed by compulsory delivery based settlement to ensure transparent and fair trade practices. NMCE offers electronic platform for future trading in plantation, spices, food grains, non-ferrous metals, oil seeds and their derivatives.
NMCE is promoted by commodity-relevant public institutions, viz., Central Warehousing Corporation (CWC), Punjab National Bank (PNB) National Agricultural Cooperative Marketing Federation of India (NAFED), Gujarat Agro-Industries Corporation Limited (GAICL), Gujarat State Agricultural Marketing Board (GSAMB), Neptune Overseas Limited (NOL), National Institute of Agricultural Marketing (NIAM), NMCE invites applications for Institutional Clearing Membership, Professional Clearing Membership, Trading Cum Clearing Memberships, and Trading Memberships.
Please call/write for further clarifications, if any:
Head – Membership
National Multi-Commodity Exchange of India Limited
4th Floor, H K House, Ashram Road,
Ahmedabad – 380 009, Gujarat, INDIA
Phone: – 91-79- 4008 6018 – 6042 – 6043
Fax: – 91-79-26582759 – 91- 079-40086041
Email: – member@nmce.com URL: – www.nmce.com
Courtesy: NMCE -
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कई साल छुपाकर रखा कैन्सर के इलाज का दवाई। इसके बारे में अधिक जानकारी केलिये अंग्रेजी में पढें। -
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11 बजे से लेकर तिरुवनन्तपुरम पालयम से बी.टी बैंगन को रोकने केलिये जो उपवास हो रहा हैं उसका ताजा समाचार प्रसारित करूँगा। अंग्रेजी और मलयालम में समाचार मौजूद हैं। अंग्रेजि को अगर कोइ हिन्दी में बदलकर मदद करेगा तो अच्छा होगा।
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धीरे धीरे उत्पत्ति- संवंधी बदलाव की गई फसल हमारे खेत भर आने की संभावना हैं। उसकेलिये ही ‘जनटिक एन्जिनीयरिंग अप्रुवल कमटी’ (GEAC) के कोशिश। ऐसे एक कमटी के जरूरत हमें नहीं। सिर्फ हमें ‘जी.ई.ए.सी भारत छोडो’ ही एक मटी को जाननेवाला एक किसान को बोल सकेगा। जनटिक एन्जिनीयरिंग सस्यों के सारे कि सारे कोश योने कि जड से लेकर फल तक जहर फैलाकर कीडे मकोडे भगाते तो वही जहर पशु, पक्षि तथा मनुष्य को भी धीरे धीरे कैसे मारेगा करके सोच सकते हैं। प्रधम हरित परिक्रमा (green revolution) बीमारियों बडाकर और मटी ती जैवाँश को खतम करके जो प्रक्रिया हुआ था वह समझ में आने केलिये कई साल लगा। उस से भयानक कारवाइ हमारे जनम से पहले मौजूद कीमती बीजों को खतम करके जी.एम बीज जगह लेने की तैय्यारि हो रहा हैं। दूध केलिये पशुओं के खुराक cotton seed meal भय के बगैर कैसे दे सकते हैं? उत्पत्ति- संवंधी बदलाव की गई सूत के बीज से निकलनेवाला तेल का क्या असर हम पर होगा वह कई साल बद ही मालूम पडेगा। अमूल्य गुण हमारे सरसों, मूभली, नारियल वगैरह से निकालकर इस्तेमाल करते थे उनके खिलाफ अफवायें फैलाकर बदले में सोया बीन और पाम ओइल ङमारे रसोई में पहूँच गया।
परिस्थिती, मटी और जमीनी कीडाओं (earth worms) को बरबाद करनेवाला शत्रु तथा मित्र कीडों के बगैर उत्पत्ति- संवंधी बदलाव के बिना इन बी.टी फसलों के साथ जो अपतृण पैदा होगा उसे खतम कने केलिये बहूत ही कठिन जहर ‘रौण्टअप’ (roundup) का इस्तेमाल करने की आवश्यकता होगी। ‘रौण्टअप’ जहर के प्रचारक बनकर काम करने वाला हमारे वौग्यनिकों को दुशमन ही समझना होगा। उत्पत्ति- संवंधी बदलाव की गई बीजों के नुक्सान पता करने केलिये ज्यादा परीक्षण की जरूरत नहीं हैं। इन पौदों से बनी कूडे की खाद (compost) में जमीनी कीडाओं को जिंदा नहीं रह सकते हैं। उत्पत्ति- संवंधी बदलाव की गई बीजों को जो वन्ध्यता (infertility) शामिल हैं वही असर मनुष्य समेत हर जीव पर होने की संभावना हैं।
जनता की भूख मिटाना ही लक्ष्य हैं तो इनसान पर उत्पत्ति-संबन्धी बदलाव करना ही उच्छा होगा। पेड के नापाई कम करके खाने की मात्रा भी कम करना एक महत्वपूर्ण सेवा होगा। अमेरिका की धन संपत्ती वरकरार रखने केलिये उत्पत्ति-संबन्धी बदलाव की गई खाना खाने पर जो बीमारियों होगा उसे इलाज करने केलिये पेटन्ट की छाया की सहरे दवाई बेचकर पूरा करना हैं क्या? अगर जनटिक एन्जिनीयरिंग मटी के सन्तुलित न्यूट्रियन्ट की तुलन सही रखकर जैव संपत्ती की बडते हालात की कायम करने पर दोनों हाथें फैलाकर स्वीकार कर सकते हैं। तमाम भारत और केरल खास करके आयुरवेद के गुण से जो कुच्छ हासिल की उसे खतम करने का खेती इस बी.टी का ही होगा। हमारे सारे पानी बरबाद हो चुका हैं। उन पानी के भविष्य इन बी.टी खेती के वजह से ओर खराब होगा।
गाय, भैंस, बकरी वगैरह के पान पोषण और दूध और माँस की लभ्यता बडाकर जैव खेती करना ही हमें विश्वसनीय मान सकते हैं। अगर किसान की उत्पन्न सिर्फ पैसा बनाने की मान कर और किसी क शेहत की नुक्सान पहूँचाने का काम आने वाला पीडियों को बरबाद करेगा। आन्ध्रा प्रदेश में सूत की खेती की गई जमीन पर खास खाने पर भैंस, गाय, बकरी वगैरह मरे और उनके पोस्टमारटम (postmortem)करने पर हृदय में सुराक नजर आये थे। वही अनुभव भविष्य में मनुष्य को भि यही हालात होंगे उत्पत्ति-संबन्धी बदलाव वाले फसल से पाने वाले खाना खाने से।
विशेष सूचना- इसी लेख को और मतलबदार बनाने का मदद का स्वागत हैं।
Picture Courtesy: The Hindu








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