केरलाफार्मरऑनलाइन.कॉम विविध भाषाई ब्लोग किसानों केलिये एक किसान प्रसारित कर रहा हूँ
  • Adv Shine's old post through search as resultsअब मलयालम ब्लोग में ताजा समाचार यह हैं। जोर्ज जोसफ नाम के (एक रिटयेर्ड हेडमास्टर) नकली ब्लोगर प्रोफैल बनाकर पहले के जमाने में नायर जात के सारे औरतें वेश्याये (रण्डी)थी करके स्थापित करनेकेलिये कई पोस्ट लिखी। इसके खिलाफ नायर सर्वीस सोसैटी के सेक्रटरी ने डी.जी.पी को एक खत दिया। उसके परिणाम सैबर सेल ने गूगिल से कम्पूटर के ऐ.पी नंपर प्राप्त करके अड्वकेट षैन को गिरफतार की और उससे पहले ही उसने हैकोर्ट से जमानत ली थी। कुच्छ महीने पहले सन्तोष नाम के एक ब्लोगर ने सेबर सेल से य़ह पूछा था “किसी ब्लोगर नफ्रत की बात (hate speech)” प्रसारित किया है करके नजर में आया कि नहीं। यह बात किसी समाचार पत्र में नहीं आया था। लेकिन कुच्छ दिनों बाद साथ के ब्लोगरों ने उस चित्रकार (Artist) के सही नाम मुरली थे, उनके गिरफतारी के बारे में पोस्ट लिखी और कुच्छ समाचार पत्रों में भी छापा। उस कारण अन्य ब्लोगरों को भी मालूम पडा। उस समय कुच्छ महीने केलिये चित्रकार के ब्लोग आमन्त्रित व्यक्तियों केलिये खुला था। ऐसे ही अब अड्वकेट षैन का भी ब्लोग आमन्त्रित व्यक्तियों केलिये खुला हैं। कुच्छ महीने बाद चित्रकार के ब्लोग के ऊपर और नीचे उशका खूद का लिखी सूचना प्रसारित करके कुच्छ गंदे पोस्टों को निकालकर अधिक शक्ती के साथ नायर जाती और ब्राह्मिण के बारे में नफ्रत की बातें प्रसारित कर रहे हैं। अब यही चित्रकार गिरफतार किया हुआ षैन के मदद की पोस्ट प्रसारित कर रहे हैं।

    नायर समुदाय के सारे स्त्रीयें वेश्यायें करके स्थापित करने केलिये छापे किताबें (हमें मालूम हैं कितने साल हुये छापना शुरू हुआ करके)  और इन्टेर नेट से सेर्च करके (वह शुरू होकर कुच्छ साल ही हुआ हैं) सपूत शामिल कर रहे हैं जो गलत हैं। तीस या चलीस उम्र के लोग ऐसे पुराने जमाने के चरित्र प्रसारित कर रहे हैं जो आँखें देखे जैसे। सैबर आक्ट 2008 के बदलाव के चर्चा के समय हमारे पारलमेन्ट में विरोधि दल हंगामा मचा रहे थे। उसी वजह से नये बदलाव किसी चर्चा के बगैर ही काम में लाया गया।

    ज्योर्ज जोसफ जो एक रिटयेर्ड अध्यापक नाम कृस्टियन नाम हैं उस नाम को अन्य समुदाय के व्यक्ति ओक वकील इस्टेमाल करने पर जरूर आश्चर्य होता हैं। अब विचित्रकेरलम ब्लोग देखने पर ऐसे नजर आयेगा।

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    ज्योर्ज जोसफ बदलकर  शंखघवरयन और उसके बाद  जी.जे बनकर गलती से मुक्त होने का प्रयास हो रहा हैं। कुच्छ दिनों बार फिर से यह ब्लोग प्रसारित होने का उमीद हैं। आज तक हम ऐसे ही देखा हैं। अभी भी कुच्छ पोस्ट गूगिल संभाल कर रखा हुआ देख सकते हैं।  सेभालकर रखाहुआ ब्लोग और कुच्छ दिनों देख पायेगा।

    सेवा की शर्तें | गोपनीयता | सामग्री नीति हर ब्लोगर पढना चाहिये।

    दूसरों की पहचान धारण करना: कृपया कोई अन्य व्यक्ति या किसी संगठन का प्रतिनिधि बनकर, जो कि आप नहीं हैं, अपने पाठकों को न भटकाएं या उन्हें भ्रमित न करें. हम यह नहीं कर रहे कि आप पैरोडी या व्यंग्य प्रकाशित नहीं कर सकते – बस ऐसी सामग्री से बचें जो संभवत: आपके पाठकों को आपकी वास्तविक पहचान की ग़लत जानकारी दे.

    ऐसे ब्लोग का लक्ष्य वर्गीयता के बढावा देना और आपस में लडने को तैय्यार करना ही हैं। एन.एस.एस के जनरल सेक्रटरी के शिकायत के कारण कारवाई हुआ और गिरफ्तारी होकर जो व्यक्ती एन.एस.एस से दूर चले गये व्यक्तियों को फिरसे शामिल कराकर संघटन के ताकत बडेगा। ऐसे होने पर अन्य जातियों का भी ताकत बडेगा। सारे राष्ट्रीय पारटियों के लक्ष्य भी वही हैं। आनेवाली पंचायती चुनाव में भायदा उढाने की एक पहली कदम होगा यह कारवाई।

    ऐसे अवस्था में तैय्यारी क्यों करना पडा जरा सोचने की बात हैं। श्री मनमोहन सिंह के इरादे की कारण शशी थरूर तिरुवनन्तपुरम लोकसभा चुनाव में एक लाख तक वोटें ज्यादा पाकर सबको हराण करदी थी। इतना ज्यादा मत वर्गीयता और पार्टी के अतीत सोचने वाले जनता के निर्णय का परिणाम हैं। कोणग्रस और अन्य पार्टी के लोगों को यह वात हजम होनेवाला नहीं था। उसका सपूत हम कई बार देख चुके हैं। थरूर नायर नहीं हैं करके एन.एस.एस के जनरल सेक्रटरी नारायण पणिक्कर  बोलने का कोई असर मत में दिखाई नहीं दी।

    कई सालों से सैबर सेल में सिन्धू जोय (सी.पी.एम), पिणराई (सी.पी.एम) और नारायण पणिक्कर के शिकायत के सिवा और क्या असर हम को दिखाई दी? इसका जवाब दस रुपये का कोर्ट फी स्टांप छिपाकर सैबर सेल के पब्लिक इनफरमेषन ओफीसर को समर्पित करके यह बात के पता करना चाहिये।

    घृणा फैलाने वाले वक्तव्य: हम ब्लॉगर का उपयोग आपके विचारों की अभिव्यक्ति के लिए करना चाहते हैं, भले ही वह अत्यधिक विवादास्पद क्यों न हो. परंतु, घृणा फैलाने वाले वक्तव्य प्रकाशित करके इस सीमा को पार न करें. इससे हमारा तात्पर्य ऐसी सामग्री से है जो वंश, नस्ल, धर्म, अक्षमता, लिंग, आयु, वरिष्ठता की स्थिति या यौन रुझान/लैंगिक पहचान के आधार पर घृणा या हिंसा फैलाती है. उदाहरण के लिए, ब्लॉग में ऐसा न लिखें कि X नस्ल वाले लोग अपराधी हैं या वे Y धर्म का पालन करने वालों के प्रति हिंसा का समर्थन करते हैं.

    गूगिल और ब्लोगर के बीच कुच्छ भी छुपा नहीं हैं। लेकिन अंजान ब्लोगर को पकडने केलिये भारत सरक्कार तथा राज्य सरकार को गूगिल के सहारा लेना पडता हैं।  ऐसे अवस्था में गूगिल के नियमो के पालन कैसे होगा

    सही उपयोग. आप यह स्वीकार करते हैं कि इस सेवा का अपने लिए उपयोग करने, आपके किसी भी संदेश, और उनके परिणामों के लिए आप स्वयं ज़िम्मेदार हैं. आप यह स्वीकार करते हैं कि आप इस सेवा का उपयोग आपके देश से निर्यातित तकनीकी डेटा के प्रेषण संबंधी किसी भी कानून और अमेरिकी निर्यात नियंत्रण कानूनों समेत विद्यमान सभी स्थानीय, प्रादेशिक, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय कानूनों, नियमों और विनियमनों के अनुसार करेंगे

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  • 11 बजे से लेकर तिरुवनन्तपुरम पालयम से बी.टी बैंगन को रोकने केलिये जो उपवास हो रहा हैं उसका ताजा समाचार प्रसारित करूँगा। अंग्रेजी और मलयालम में समाचार मौजूद हैं। अंग्रेजि को अगर कोइ हिन्दी में बदलकर मदद करेगा तो अच्छा होगा।

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  • If you are using Twitter and Firefox then you can follow Dr. Shashi Tharoor with quick time updates which a MP can do for transparency of his service.

    ]भारत में ऐसे कितने एम.पी होगा जो जीतने के बाद जनता से मिलाप रखते हैं? हो सकता है सिर्फ एक व्यक्ती  शशी थरूर होगा। ए.ऐ.सी.सी, के.पी.सी.सी और प्रादेशिक संविधान एम.पी और मन्त्रियों को कार्य निर्वहण केलियो मदद करनेवाला होना चाहिये। बल्की केरल जैसे देश में कार्य निरवहण पार्टी सेक्रटेरियट और पोलिटब्यूरो के नियंत्रण में हैं।  उसकी परिणाम हम 2009 के मतदान से  प्राप्त की गई नतीजे से मालूम कर सकते हैं। कुच्छ लोगों के निर्णय आम जनता के खिलाफ होने का सपूत था पार्टी के बीच के अंत्रोणी झगडे, जनता दल जैसे पार्टी शुरू से उनके साथ थे उनको बाहर धकेलना, धर्मनिरपेक्ष बोलकर पि.डि.पी को प्रचारण के सदस्य बनाना, लावलिन हेराफेरी से पिणराइ विजयन को बचाने केलिये अडवकेट जनरल के मदद  लेना आदी इस चुनाव में  यू.पी.ए को गुणदायक बन गया। जनता या जाती, मत तथा कक्षि राष्ट्रीयता से मुक्त मतदाताओं को खिलाफ बनाने का पूरा जिम्मेदारी पिणराइ विजयन का ही हैं।

    तिरुवनन्तपुरम के उमीदवार डो शशी थरूर और उसे मौका देने केलिये कोण्ग्रस के  नेतृत्व के निर्णय एक लाख तक के ज्यादा मतदान हासिल करके एक बडिया कमाल करके दिखाया। चुनाव के सारे खर्चे थरूर के कमाई से ही किया।  उनके ऐसे जीत के प्रधान कारण उन्होंने जो महत्वपूर्ण वादा जनता के सामने रखा था इसलिये हैँ। शुरी से उन्होंने यह बताया कि वे एक विभिन्न स्वभाव के एम.पी होगा और जीतने के बाद जनता से मिलाप रखूँगा मलयालम लिखने नहीं आता तो भी समझ सकते हैं और उन बातों को आंग्रेजी और हिन्दी में दिल्ली में समर्पित करूँगा। शुरू में ही उन्होंने जो मतदाताओं को उमीदवार के पहचान करानेवाला पोस्टर और बानर लगाया हुआ था उनको निकालकर एक साफ शहर कायम रखने का काम में शामिल हुये। साथ ही आम जनता से संपर्क रखने केलिये संविधान के रूप का निर्माम खोषित की जो पार्टियों से मुक्त व्यक्ती हर दिन दो खंडे का अवसर प्रदान करूँगा। नेट में  दुनिया के किसी भी कोने से उनको  ट्विट्टर में सन्देश प्राप्त कर सकते है उनके पीछे करने पर। इसी को जनहित बोल सकते हैं। भारत में ऐसे कितने नेता होंगे अधिकार प्राप्त होने के बाद आम जनता से मिलाप रखना चाहते हैं?

    आजतक जो अधिकार संभाले लोगों में अधिक लोग हेराभेरी में शामिल थे। राहुल गान्धी जैसे युव और सीथे साथे व्यक्ती मंत्री के पद संभालना  भी एक शुभ सूचना हैं। भारत केलिये कामकरनेवाला एक सामूहिक नेटवर्क  इन्डी पेपल में थरूर के हाजरी उन्हें और महत्वपूर्ण बना रहे हैं। डो. थरूर के  ब्लोग पढने और अभिप्राय लिखनेका अवसर भी प्राप्त हैं। सारे भारत के बारे में विशाल जानकारी भी वह सैट दे रहे हैं।

    झीतने के बाद हर एम.पी उस प्रदेस के पूरे जनता के प्रतिनिधित्व करनेवाला बनजाता हैं। उसे काम में लाने केलिये जनता से मिलाप रखने का संविधान किसी स्वतंत्र व्यक्ती के जरीये होना चाहिये। शशी थरूर के तरफ से ऐसे ही वादा को काम में लाने की कोशिश देख सकते हैं।  इस चुनाव से पहले थरूर के एन.आर.ऐ दोस्त के जरीये मुलाकात करने केलिये हम  तिरुवनन्तपुरम के कुच्छ ब्लोगर उन के खर पहूँचे थे। लेकि एक नेता वहाँ जो मौजूद थे उन्होंने मुलाकात का मौका देने से इनकार किया और हम को आदेश दी  तम्पानूर रवी के जरिये ही आना चाहिये। लेकिन थरूर ने हमें मुलाकात के कुच्छ वक्त जरूर दी। इस का साफ मतलब यह था सारे नियंत्रण इन च्छोटे नेताओं के हाथ में निरभर थे। उन्हें मालूम नहीं होगा जो थरूर को एक लाख तक मत ज्यादा मिला स्वतंत्र मतदाताओं से ही हैं।

    जो व्यक्तिगत नहीं और आम जनता केलिये गुण पानेवाला समस्याओं को एम.पी के पास पहूँचाने के बीच इन चमलों के धकेल से सावधान रहना होगा। ऐसे गलत तरीके का मुक्ती  डो. थरूर के पास होगा तो उससे अच्छा और कौन सा बात हो सकते हैं आम जनता केलिये।

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  • डो. शशी तरूर ने 99998 ज्यादा वोटों से जीतकर तिरुवनन्तपुरम के नाम रोषण कर दी। हमारे हार्दिक मुबारक हो।

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  • Murali.T

    Murali.T,
    “Adwaidam”,
    Nr.Theroth Kavu,
    Kakkad, Kannur-670 005
    ph(off):0497-2711027
    M-Kerala-9249401004
    rekhacreations@gmail.com

    मलयालम ब्लोग के बीच ऐसे एक ब्लोग चित्रकारन नाम पर प्रसारित हैं। उनके सभी पोस्टों में ब्राह्मिण और नायर समुदाय के खिलाफ ऐसे लेख प्रस्तुत करते जा रहे हैं। ऐसे गंचे शब्दों के इस्तेमाल के वजह से किसी दूसरे के पोस्टों में इस चित्रकारन के कमेन्ट मना करते थे या निकाल देते थे। यह व्यक्ती ईऴव समुदाय के हैं। परंतू किसी भी ऊँचे समुदाय के व्यक्ती कभी भी इस यमुदाय के खिलाफ चित्रकारन के जैसे लेख कभी भी प्रसारित नहीं की।

    कुच्छ महीने पहले इस व्यक्ती ने सारे मलयाली को बेवकूफ बनाकर एक नये तरीके अपनाया। वह यह था नये ब्लोगरों के सहायता केलिये केरल ब्लोग अकादमी और उसके कई शाखायें कई जिले में ब्लोग नाम से शुरू की। उन तमाम ब्लोगों में इस व्यक्ती के गंदे ब्लोग लिंग भी शामिल की थी। जब तिरुवनन्तपुरम जिले में यह शिल्पशाला ङुआ था तब इस व्यक्ती के काले मुह को दुनिया के सामने लाने में मैं कामयाप हुआ था। उसके बाद मेरे खिलाफ ऐसे गंदे धब्द सहित मेरे खिलाफ कई पोस्ट लिखे थे। इस व्यक्ती ने जो करवाई शुरू की उसका नकीजा ङम मुंबई में देख रहे हैं वही होगा। उसलिये भाईचारा और शांति कायम रखने केलिये मुझे यह पोस्ट डालना पड रहा हैं। जरूर कुच्छ साल बाद जब मलयालम को हिन्दी में बदलकर पढने की सुविधा गूगिल प्रदान करेगा तब आप लोगों को इस मुरली नाम के चित्रकारन से असली रूप नजर आयेगा।

    मैं ने अपने पहचान बताकर पोस्ट लिखता हूँ। उसी वजह से मेरा लेख गंदी बातें या समुदाय को प्रकोपित करने वाला एक लफ्स भी नहीं होगा। जब तिरुवनन्तपुरम में शिल्पशाला हुआ था तब मैं ने इस मुरली को मेरा विसिटिंग कारड दिया उसके बदले में उसने भी गलती से उसका कार्ड मुझे दी। उस दिन से ब्लोग में यह अन्जान व्यक्ती चित्रकारन पहचानवाले हो चुके हैं।

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