केरलाफार्मरऑनलाइन.कॉम विविध भाषाई ब्लोग किसानों केलिये एक किसान प्रसारित कर रहा हूँ

  • वर्ष 2009-10 में उत्पादन घटा

    देश में प्राकृतिक रबर के उत्पादन में 2009-10 के दौरान 3.8 प्रतिशत की गिरावट आई है।

    कुल उत्पादन पिछले वित्त वर्ष के 8,64,500 टन से घटकर 8,31,400 टन रह गया है। वहीं रबर की खपत में 6.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है और यह 8,71,720 टन से बढ़कर 9,30,565 टन हो गया है। इससे पिछले 3-4 साल से इस जिंस की मांग आपूर्ति के बीच में अंतर बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।

    रबर बोर्ड के मुताबिक 2009-10 के दौरान पिछले साल की तुलना में रबर की खपत में बढ़ोतरी की प्रमुख वजह टायर क्षेत्र से बढ़ी हुई मांग है। सीएट, जेके और ब्रिजस्टोन टायर ने उत्पादन क्षमता में विस्तार किया है। साथ ही बिड़ला, अपोलो और टीवीएस श्रीचक्र टायर ने नए संयंत्र स्थापित किए हैं।

    बोर्ड का यह भी मानना है कि चालू वित्त वर्ष में भी यही स्थिति बनी रहेगी, जिससे रबर की मांग और आपूर्ति के बीच अंतर और बढ़ेगा। बोर्ड के आरंभिक अनुमानों के मुताबिक देश में 31 मार्च तक रबर का कुल स्टॉक 2,48,000 टन था, जबकि पिछले साल की समान अवधि में रबर का स्टॉक 1,96,230 (सही संख्या ऊपर चित्र में देख सकते हैं।) टन था। लेकिन बोर्ड के यह आंकड़े स्थानीय बाजार की धारणा से मेल नहीं खाते।

    आभार – बिजनेस स्टैंडर्ड

    आँकडे की विश्लेषण स्प्रेडषीटों पर

    इन स्प्रेडषीटों पर प्रसारित आँकडे की विश्लेषण और कहीं नहीं मिलेगा।

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  • 11 बजे से लेकर तिरुवनन्तपुरम पालयम से बी.टी बैंगन को रोकने केलिये जो उपवास हो रहा हैं उसका ताजा समाचार प्रसारित करूँगा। अंग्रेजी और मलयालम में समाचार मौजूद हैं। अंग्रेजि को अगर कोइ हिन्दी में बदलकर मदद करेगा तो अच्छा होगा।

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  • A chat with the famous Freelance Journalist K.Govidankutty a sweetener.
    Govindan: i would like to visit your farm one of these days…you know there is a great poem of walt whitman..saying

    i would rather go and live in the midst of animals/because they do not fret and fume, they do not discuss their duty to god, they are not demented by the mania of owning things.
    being with animals and plants is a creative exercise..perhaps more than with humans…
    Keralafarmer: We have to understand Animals & Plants needs in time
    Govindan: quite true…long before American botanists began hesitantly talking about it, aurobindo propounded a theory of animal consciousness..
    ok. take care of your cows–holy among them in particular..

    जब से आप ने केरल में राजनीती के भागीदार बने तब से बहूत ही कठिनाइयों को पार करना पडा। भारतवासी नहीं, कुर्ता और  धोती पहनने लगा, मलयालम मालूम नहीं आदी आप के खिलाफ उठाई गई शब्दें हैं।  हम तिरुवनन्तपुरम के रहने वालों को ऐसे आरोपण में कोई शंका  नहीं  था। उसी वजह से आप यहाँ से एक लाक करीब ज्यादा मत अधिक पाकर जीत गये।  आप जैसे एक महान व्यक्ती  को चुनाव में लडने केलिये शामिल करकर प्रधान मन्त्री मनमोहन और कोणग्रस अध्यक्ष सोणिया जी ने राष्ट्रीय कापट्य से दबे हुये हम को बचाकर  बडे वरदान दी।

    ट्विटर में आप के पीझे करनेवालों (followers) के संख्या  की  बढना (माध्यम के हिस्सा बहूत महत्वपूर्ण था) कइयों के नीन्द हराम कर दी। बी.जे.पी पक्ष के एक पत्रकार “काटिल क्लास ” वाक्यों के इस्तेमाल ट्वीट सवाल के रूप में  भेजा और जवाब में “काटिल क्लास” और “होली कौ” की  इस्तेमाल  आपने की। वह श्री थरूर को एक कदम और आगे पहूँचा दी। “धन्यवाद बोलना चाहिये कान्चल गुप्ता को” इस महत्वपूर्ण सेवा केलिये।  अब ट्विटर कम्यूणिटी ने आप को ट्विट्टर के भारतीय अंबासडर बना दी। अब सब डर रहे हैं ट्विटर आप के वोट बेंक बन रहे हैं करके। जो जाती, मत, कक्षि राष्ट्रीय पक्षपात  के बगैर वोट बैंक बनकर आप के पीझे करने पर। अक केलिये सहयोग के कारण आप पर आम जनता के विश्वास ही हैं।

    आप हमेशा बोलता हैं एक स्थानार्थि जीतने पर सारे जनता का सेवक हैं। हम ऐसे नेता ही चाहते हैं। कोण्ग्रस के ही दूसरे स्थान के नेतायें आप के खिलाफ होने का कारण काटिल क्लास और होली कौ   को लेकर हंगामा मचा दी। हम ऐसे  भाषण देखा, पढा ऐर सुना। लेकिन असलियत समझने में आप के नये ट्वीट तक इन्तजार करना पडा। उस बात पर बगैर जरूरत आप को माभी माँगना पडा। एक किसान होने के बौजूद मुझे भी समझ में आया जो काटिल क्लास और होली कौ  शब्दों में ऐसे कोई गलती ही नहीं  था। परन्तू एक एक वाक्य के विश्लेषण करने पर गलत मतलब ही निकलता हैं।

    अगले चुनाव में आपको कोई बानर, कटऔट और दीवारों में लिखाई वगैरह के कोई जरूरत ही नहीं। बदले में चुनाव के दौराण ट्विटर, ब्लाक बरी और कमप्यूटर सारे काम सरल बनायेगा। बढते टेकनोलजी  तबतक ऐसे अवस्था में पहूँचेगा करके उमीद रख सकके हैं। अगले  बार आप जब तिरुवनन्तपुरम में  आयेगा  तब आप के पीझे करने वाले ट्विटर उपयोक्ताओं  को इकटा करके कुझ समय मिलाप और बातचीत केलिये मौका जरूर देना। जैसे आप ने दिल्ली ब्लोगरों के साथ समय बिताया। हम वादा करता हैं आप के हर अच्छे कामों में हम सब आप के साथ होगा।

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  • CRITICS SILENCED: Minister of State for External Affairs Shashi Tharoor travels in the economy class in the first week of August.

    Shashi Tharoorभास्कर डॉट कॉम विशेष. हाल ही में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के सादगी और मितव्ययता अभियान को लेकर विदेश राज्यमंत्री शशि थरूर के दिए एक बयान से हंगामा मच गया। थरूर ने कहा कि वे विमान की इकोनॉमी क्लास में यात्रा करने वालों के कैटल क्लास (मवेशी दर्जा) मानते हैं। उनके इस बयान के बाद ना सिर्फ कांग्रेस पार्टी में तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की गई, बल्कि देशभर से लोगों ने इस पर अपना कड़ा विरोध जताया।

    भास्कर डॉट कॉम को भी उनके सैकड़ों व्यूअर्स ने फीडबैक भेजकर इस बयान को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। बयान के बाद से ही थरूर परिदृश्य से लापता थे। हमने पूरे मामले को लेकर शशि थरूर से बात करने की कोशिश की। गुरुवार को भास्कर डॉट कॉम की चार घंटे की अथक कोशिश के बाद आखिर हमने उन्हें टिवटर पर ढ़ूंढ ही लिया। जहां थरूर ने ना सिर्फ विवादास्पद मुद्दों पर बात की बल्कि यहां तक कहा कि यदि लोगों को उनके बयान से दुख पहुंचा हो तो वे माफी मांगते हैं।

    पेश है शशि से बातचीत का शब्दशः अनुवाद। खबर के नीचे ट्वीटर पर हुई मूल बातचीत का अंग्रेजी वर्जन भी पढ़ें…

    भास्करः क्या आपने विमान के तीसरे दर्जे में यात्रा करने वालों को कैटल क्लास कहा…

    शशि – मेरे बयान का गलत मतलब निकाला गया है। मैंने तो एक पत्रकार द्वारा इस्तेमाल किये गए शब्दों को ही दोहराया था। लेकिन अगर लोग इससे आहत हुए हैं, तो मैं माफ़ी मांगता हूं। कैटल क्लास एक निंदनीय शब्द है, लेकिन मैंने इसका इस्तेमाल इकोनॉमी क्लास में सफ़र करने वाले लोगों के लिए नहीं किया था, बल्कि मैंने उस एयरलाइन्स के लिए कहा था जो लोगों को जानवरों की तरह हवाई जहाज में ठूंस देती है, अगर फिर भी लोग को मेरी बात से दुख पहुंचा है, तो माफ़ी मांगता हूँ। शायद मेरे द्वारा प्रयुक्त मुहावरे का गलत अर्थ निकाला गया है।

    भास्कर:  शशि जी लोगों को लगता है कि आपने ही इस मुहावरे को बनाया है। आपका क्या कहना है?

    शशि: अब मुझे एहसास हो गया है कि मुझे यह नहीं सोचना चाहिए कि लोग मेरे द्वारा किए गए हलके मजाक को समझेंगे या मुहावरे का सही अर्थ निकालेंगे। मुझे उन लोगों को मौका नहीं देना चाहिए जो मेरी बातों को तोड़ मरोड़कर बवाल खड़ा कर सकते हैं।

    भास्कर: शशि जी क्या आप स्पष्ट करेंगे कि होली काऊ शब्द आपने किस सन्दर्भ में इस्तेमाल किया?

    शशि: होली काऊ कोई विशेष व्यक्ति नहीं है बल्कि यह वो पवित्र मुद्दे और सिद्वांत है जिन पर सवाल करने की हिम्मत लोग नहीं कर पाते हैं। आशा करता हूं कि मेरे आलोचक इस बात पर भी ध्यान देंगे।

    ट्वीटर पर शशि थरूर से किए गए बातचीत का विवरण…

    Question: @ShashiTharoor Shashi ji people are reacting hard to ur cattle and holy cow comment..what did u have to say?

    Shashi: learned belatedly of fuss over my tweet replying to journo’s query whether i wld travel to Kerala in “cattle class”. His phrase which i rptd.  it’s a silly expression but means no disrespect to economy travellers, only to airlines for herding us in like cattle. Many have misunderstdabout.

    Question: @ShashiTharoor ya many have and comments are really hard, it might have angered a thousand of them, Many r even demanding ur resignation, we got comments from all over, was ur comment misunderstood.?

    Shashi: i’m told it sounds worse in Malayalam, esp out of context. To those hurt by the belief that my repeating the phrase showed contempt: sorry.

    Question: @ShashiTharoor the fact is people are thinking that u have invented the PUN, a few have idea that it is widely used?

    Shashi: i now realize i shldnt assume people will appreciate humour. &u shouldn’t give those who wld wilfully distort yr words an opportnty to do so.

    Question: @ShashiTharoor Shashi can u please clarify what do u mean when u said Holy Cows, i think I am taking it wrong?

    Shashi: @dilnawazpasha holy cows are NOT individuals but sacrosanct issues or principles that no one dares challenge. Wish critics wld look it up…. from web in reply to dilnawazpasha.

    क्या है पूरा मामला?

    दरअसल कांग्रेस के कम खर्चे के लिए चलाए जा रहे अभियान के बाद एक पत्रकार ने शशि से ट्विट्टर पर एक सवाल किया था…

    वो सवाल ये है…

    @ShashiTharoor Tell us Minister, next time you travel to Kerala, will it be cattle class?11:57 PM Sep 14th from TweetDeck in reply to ShashiTharoor

    इस पर शशि ने जवाब दिया था…

    @KanchanGupta absolutely, in cattle class out of solidarity with all our holy cows!12:17 AM Sep 15th from web in reply to question.

    (शशि के इसी जवाब पर राजनीतिक जगत में ऐसा बवाल मचा है कि राजस्थान के कांग्रेसी मुख्यमंत्री तक ने उनसे इस्तीफे की मांग तक कर डाली।)

    हमने शशि थरूर से राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा उनका इस्तीफा मांगे जाने पर भी सवाल किया लेकिन इस बात पर उन्होंने कुछ नहीं कहा। गौरतलब है कि शशि इस समय विदेश दौरे पर हैं।

    आभार – दैनिक भास्कर[/lang_hi

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