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जी.इ.ए.सी भारत छोडो।
10 Commentsधीरे धीरे उत्पत्ति- संवंधी बदलाव की गई फसल हमारे खेत भर आने की संभावना हैं। उसकेलिये ही ‘जनटिक एन्जिनीयरिंग अप्रुवल कमटी’ (GEAC) के कोशिश। ऐसे एक कमटी के जरूरत हमें नहीं। सिर्फ हमें ‘जी.ई.ए.सी भारत छोडो’ ही एक मटी को जाननेवाला एक किसान को बोल सकेगा। जनटिक एन्जिनीयरिंग सस्यों के सारे कि सारे कोश योने कि जड से लेकर फल तक जहर फैलाकर कीडे मकोडे भगाते तो वही जहर पशु, पक्षि तथा मनुष्य को भी धीरे धीरे कैसे मारेगा करके सोच सकते हैं। प्रधम हरित परिक्रमा (green revolution) बीमारियों बडाकर और मटी ती जैवाँश को खतम करके जो प्रक्रिया हुआ था वह समझ में आने केलिये कई साल लगा। उस से भयानक कारवाइ हमारे जनम से पहले मौजूद कीमती बीजों को खतम करके जी.एम बीज जगह लेने की तैय्यारि हो रहा हैं। दूध केलिये पशुओं के खुराक cotton seed meal भय के बगैर कैसे दे सकते हैं? उत्पत्ति- संवंधी बदलाव की गई सूत के बीज से निकलनेवाला तेल का क्या असर हम पर होगा वह कई साल बद ही मालूम पडेगा। अमूल्य गुण हमारे सरसों, मूभली, नारियल वगैरह से निकालकर इस्तेमाल करते थे उनके खिलाफ अफवायें फैलाकर बदले में सोया बीन और पाम ओइल ङमारे रसोई में पहूँच गया।
परिस्थिती, मटी और जमीनी कीडाओं (earth worms) को बरबाद करनेवाला शत्रु तथा मित्र कीडों के बगैर उत्पत्ति- संवंधी बदलाव के बिना इन बी.टी फसलों के साथ जो अपतृण पैदा होगा उसे खतम कने केलिये बहूत ही कठिन जहर ‘रौण्टअप’ (roundup) का इस्तेमाल करने की आवश्यकता होगी। ‘रौण्टअप’ जहर के प्रचारक बनकर काम करने वाला हमारे वौग्यनिकों को दुशमन ही समझना होगा। उत्पत्ति- संवंधी बदलाव की गई बीजों के नुक्सान पता करने केलिये ज्यादा परीक्षण की जरूरत नहीं हैं। इन पौदों से बनी कूडे की खाद (compost) में जमीनी कीडाओं को जिंदा नहीं रह सकते हैं। उत्पत्ति- संवंधी बदलाव की गई बीजों को जो वन्ध्यता (infertility) शामिल हैं वही असर मनुष्य समेत हर जीव पर होने की संभावना हैं।
जनता की भूख मिटाना ही लक्ष्य हैं तो इनसान पर उत्पत्ति-संबन्धी बदलाव करना ही उच्छा होगा। पेड के नापाई कम करके खाने की मात्रा भी कम करना एक महत्वपूर्ण सेवा होगा। अमेरिका की धन संपत्ती वरकरार रखने केलिये उत्पत्ति-संबन्धी बदलाव की गई खाना खाने पर जो बीमारियों होगा उसे इलाज करने केलिये पेटन्ट की छाया की सहरे दवाई बेचकर पूरा करना हैं क्या? अगर जनटिक एन्जिनीयरिंग मटी के सन्तुलित न्यूट्रियन्ट की तुलन सही रखकर जैव संपत्ती की बडते हालात की कायम करने पर दोनों हाथें फैलाकर स्वीकार कर सकते हैं। तमाम भारत और केरल खास करके आयुरवेद के गुण से जो कुच्छ हासिल की उसे खतम करने का खेती इस बी.टी का ही होगा। हमारे सारे पानी बरबाद हो चुका हैं। उन पानी के भविष्य इन बी.टी खेती के वजह से ओर खराब होगा।
गाय, भैंस, बकरी वगैरह के पान पोषण और दूध और माँस की लभ्यता बडाकर जैव खेती करना ही हमें विश्वसनीय मान सकते हैं। अगर किसान की उत्पन्न सिर्फ पैसा बनाने की मान कर और किसी क शेहत की नुक्सान पहूँचाने का काम आने वाला पीडियों को बरबाद करेगा। आन्ध्रा प्रदेश में सूत की खेती की गई जमीन पर खास खाने पर भैंस, गाय, बकरी वगैरह मरे और उनके पोस्टमारटम (postmortem)करने पर हृदय में सुराक नजर आये थे। वही अनुभव भविष्य में मनुष्य को भि यही हालात होंगे उत्पत्ति-संबन्धी बदलाव वाले फसल से पाने वाले खाना खाने से।
विशेष सूचना- इसी लेख को और मतलबदार बनाने का मदद का स्वागत हैं।
Picture Courtesy: The Hindu
10 Responses to “जी.इ.ए.सी भारत छोडो।”
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Harish V said on 19 October 2009 at 9:13 AM
Good, timely posting. MS Swaminathan is behind this dirty decision. He trickily went absent in GEAC meeting.
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Hi, I’ve translated the page to English, You can access it here http://bit.ly/MMJmU
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Thanks Harish & Anand Mallaya for fast and fine transilation in English. Let some one translate it in to Hindi.
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[...] This post was mentioned on Twitter by കേരളഫാര്മര് and കേരളഫാര്മര്, Lab Rat. Lab Rat said: Voice of a farmer from Kerala ( @keralafarmer )on his dissent of the GEAC approval for BT Brinjal – http://bit.ly/YXJy0 #GMO #India [...]
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Dr.Jayan said on 19 October 2009 at 7:26 PM
Very relevant and timely post!
Let’s all fight it together!
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santhosh said on 19 October 2009 at 7:44 PM
കൊള്ളാം… നല്ല ഐറ്റം.
പക്ഷേ, എല്ലാം രാഷ്ട്രീയമായി മാത്രം നോക്കിക്കാണുന്ന ഇന്ത്യയില് ബി ടി വഴുതനങ്ങയെ പിന്തുണയ്ക്കാനും ആളുണ്ട്. സ്വന്തം പോക്കറ്റിലേക്ക് എന്തുവരുമെന്നു മാത്രം നോക്കി ഒരു ജനതയെ മുഴുവന് അത്യാഹിതത്തിലേക്ക് തള്ളിവിടാന് മടികാണിക്കാത്ത ഇക്കൂട്ടര്ക്ക് സ്തുതി പാടാനും ഇവിടെ ആളുണ്ട്. ഇല്ലെങ്കില് ആന്ദ്രയിലെ പരുത്തികര്ഷകരുടെ അനുഭവം ഇവരൊന്നും മറവിയുടെ ഇരുട്ടറയിലേക്ക് തള്ളുകയില്ലായിരുന്നു.
ഇത്തരം ഉട്ടോപ്യന് ആശയങ്ങളെ എതിര്ക്കുന്നവനെ മണ്ടനും വിഡ്ഢിയുമായി ചിത്രീകരിക്കുന്ന ഈ സമയത്തും ബി ടി വഴുതനങ്ങയ്ക്കെതിരെ പ്രതികരിക്കാന് തയ്യാറായതില് ഫാര്മറെ അഭിനന്ദിക്കുന്നു. -
Balanandan said on 19 October 2009 at 11:32 PM
Our Ayurvedic system of medicine is purely based on the traditional qualities of medicinal plants and other ingredients. The qualities of Ayurvedic preparations will be lost if Genetically Modified ingredients alone are available. So GM plants will destroy our total health and wealth, not only for us for our future generations also.
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Rakesh said on 20 October 2009 at 12:12 PM
nice
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Prasanth said on 25 October 2009 at 3:55 PM
Excellent article. Do check out greenpeace.in. Let us fight it toghether. Many ayurvedic herbs are no longer found because of climate change due to unethical, commercialised farming.
Let us fight it together.
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Afsal m n said on 12 August 2010 at 11:51 PM
This site is very helpful ….
Thank you sir…




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