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प्राकृतिक रबर (आरएसएस -4 ग्रेड) की कीमत के रूप Rs.174 पिछले हफ्ते एक सब समय उच्च छुआ, केरल के रबर बागान मालिकों और अधिक लाभ की संभावना के साथ हरकत में ला दिया है.
करीब एक किलो 25 के एक कम से लगभग दस साल पहले पिछले महीने के, प्राकृतिक रबड़ के मूल्य soared है, के रूप में लाटेकस की कीमत है, जो अब 120 रुपये प्रति किलो के आसपास है, एक के लिए 100 रुपये एक महीने की तुलना में मूल्य आदेश हैं पहले.
हाल कीमत स्पाइक चीन में कम stockpiles द्वारा शुरू किया गया है – सबसे बड़ा उपभोक्ता और दुनिया का सबसे बड़ा ऑटो बाजार – जो, बारी में, टोक्यो में वायदा करने के कारण 3231 में एक डॉलर प्रति टन करने के लिए चढ़ाई.
या – स्तुति – इस घटना के लिए मानसून की बारिश दोष.
भारी वर्षा के रूप में रबड़ के दोहन बाधा – वर्षा भी थाईलैंड में उत्पादन बाधित है, रबड़ के लिए दुनिया की सबसे बड़ी निर्माता और निर्यातक – मांग बनी हुई है जबकि आपूर्ति तंग रहता है.
और हाँ, रबर बागान मालिकों अभी भी अपने कंबल के तहत तंग सोने के बाद से कीमतों में वृद्धि करने के लिए भविष्यवाणी कर रहे हैं जा सकते हैं.
कमोडिटी विश्लेषकों के अनुसार, तेल की कीमतों उड़नेवाला और ऑटोमोबाइल निर्माताओं से घरेलू मांग में वृद्धि करने के लिए कीमतों में ऊपर की ओर धक्का जारी रहेगा.
जहाँ भी तुम – वायदा कारोबार को दोष या अनियमित आयात प्रवृत्ति जगह -. विशेषज्ञों का कहना है, रबड़ के लिए है अगली तिमाही में 200-220/kg रुपये के स्तर तक पहुँचने.
इस कीमत के स्तर का आयोजन करेगा? याद रखें, लोचदार रबर अनिवार्य है – क्या हो जाता है अंत में नीचे आना चाहिए.
अंतरराष्ट्रीय रबर स्टडी (IRSG) समूह, वैश्विक वाहन निर्माताओं के अनुसार वापस उत्पादन बढ़ाया है, नौकरी और कटौती बंद करने की मांग में गिरावट की वजह से कारखानों, रबर के वायदा क़ुतुबनुमे करने के लिए कारण.
रबड़ बागान मालिकों एक घातक – संयोजन एक विश्वव्यापी आर्थिक मंदी, वैश्विक ऑटोमोबाइल उद्योग में एक मजबूत बनाने में मंदी का सामना है, और जारी रखने के कम तेल की कीमतों
दुनिया में प्राकृतिक रबर की चौथी सबसे बड़ी निर्माता के बाद, के रूप में थाईलैंड, इंडोनेशिया और मलेशिया, भारत, के एक हिस्से के साथ आठ और नौ के बीच दुनिया के उत्पादन का प्रतिशत, के लिए सावधान किया जाना है.
अन्य सभी रबर से बढ़ती कंपनियों के लिए उत्पादकता बढ़ाने के लिए प्रयास कर रहे हैं, लेकिन केरल के रबर बागान मालिकों आसान पैसे raking में खुश हैं. के लिए केरल राज्य योजना बोर्ड की आर्थिक समीक्षा, Stateaccounts के अनुसार 81 प्रतिशत क्षेत्र में देश में रबड़ के अंतर्गत.
2008-09 में फसल के अंतर्गत कवरेज के 5430 हेक्टेयर से अधिक 5.17 लाख हेक्टेयर था. पिछले वर्ष की तुलना में.
लेकिन उत्पादकता, जो 2008 में 1903 / वर्ष प्रति हेक्टेयर किलो था 2009 में 1,796 किलोग्राम गिरा दिया.
जब तक केरल के रबर बागान मालिकों को उनके मोजे खींचने के लिए और थाईलैंड, इंडोनेशिया और मलेशिया में अपने प्रतिद्वंद्वियों द्वारा प्रदर्शित उत्साह के साथ अपने वृक्षारोपण के लिए करते हैं, वे लंबे समय के लिए मूल्य बाघ की सवारी की उम्मीद नहीं कर सकते हैं.
सहायता – गूगिल ट्रानसिलेषन दि हिन्दू बिसिनेसतैन
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अब मलयालम ब्लोग में ताजा समाचार यह हैं। जोर्ज जोसफ नाम के (एक रिटयेर्ड हेडमास्टर) नकली ब्लोगर प्रोफैल बनाकर पहले के जमाने में नायर जात के सारे औरतें वेश्याये (रण्डी)थी करके स्थापित करनेकेलिये कई पोस्ट लिखी। इसके खिलाफ नायर सर्वीस सोसैटी के सेक्रटरी ने डी.जी.पी को एक खत दिया। उसके परिणाम सैबर सेल ने गूगिल से कम्पूटर के ऐ.पी नंपर प्राप्त करके अड्वकेट षैन को गिरफतार की और उससे पहले ही उसने हैकोर्ट से जमानत ली थी। कुच्छ महीने पहले सन्तोष नाम के एक ब्लोगर ने सेबर सेल से य़ह पूछा था “किसी ब्लोगर नफ्रत की बात (hate speech)” प्रसारित किया है करके नजर में आया कि नहीं। यह बात किसी समाचार पत्र में नहीं आया था। लेकिन कुच्छ दिनों बाद साथ के ब्लोगरों ने उस चित्रकार (Artist) के सही नाम मुरली थे, उनके गिरफतारी के बारे में पोस्ट लिखी और कुच्छ समाचार पत्रों में भी छापा। उस कारण अन्य ब्लोगरों को भी मालूम पडा। उस समय कुच्छ महीने केलिये चित्रकार के ब्लोग आमन्त्रित व्यक्तियों केलिये खुला था। ऐसे ही अब अड्वकेट षैन का भी ब्लोग आमन्त्रित व्यक्तियों केलिये खुला हैं। कुच्छ महीने बाद चित्रकार के ब्लोग के ऊपर और नीचे उशका खूद का लिखी सूचना प्रसारित करके कुच्छ गंदे पोस्टों को निकालकर अधिक शक्ती के साथ नायर जाती और ब्राह्मिण के बारे में नफ्रत की बातें प्रसारित कर रहे हैं। अब यही चित्रकार गिरफतार किया हुआ षैन के मदद की पोस्ट प्रसारित कर रहे हैं।नायर समुदाय के सारे स्त्रीयें वेश्यायें करके स्थापित करने केलिये छापे किताबें (हमें मालूम हैं कितने साल हुये छापना शुरू हुआ करके) और इन्टेर नेट से सेर्च करके (वह शुरू होकर कुच्छ साल ही हुआ हैं) सपूत शामिल कर रहे हैं जो गलत हैं। तीस या चलीस उम्र के लोग ऐसे पुराने जमाने के चरित्र प्रसारित कर रहे हैं जो आँखें देखे जैसे। सैबर आक्ट 2008 के बदलाव के चर्चा के समय हमारे पारलमेन्ट में विरोधि दल हंगामा मचा रहे थे। उसी वजह से नये बदलाव किसी चर्चा के बगैर ही काम में लाया गया।
ज्योर्ज जोसफ जो एक रिटयेर्ड अध्यापक नाम कृस्टियन नाम हैं उस नाम को अन्य समुदाय के व्यक्ति ओक वकील इस्टेमाल करने पर जरूर आश्चर्य होता हैं। अब विचित्रकेरलम ब्लोग देखने पर ऐसे नजर आयेगा।
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ज्योर्ज जोसफ बदलकर शंखघवरयन और उसके बाद जी.जे बनकर गलती से मुक्त होने का प्रयास हो रहा हैं। कुच्छ दिनों बार फिर से यह ब्लोग प्रसारित होने का उमीद हैं। आज तक हम ऐसे ही देखा हैं। अभी भी कुच्छ पोस्ट गूगिल संभाल कर रखा हुआ देख सकते हैं। सेभालकर रखाहुआ ब्लोग और कुच्छ दिनों देख पायेगा।
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ऐसे ब्लोग का लक्ष्य वर्गीयता के बढावा देना और आपस में लडने को तैय्यार करना ही हैं। एन.एस.एस के जनरल सेक्रटरी के शिकायत के कारण कारवाई हुआ और गिरफ्तारी होकर जो व्यक्ती एन.एस.एस से दूर चले गये व्यक्तियों को फिरसे शामिल कराकर संघटन के ताकत बडेगा। ऐसे होने पर अन्य जातियों का भी ताकत बडेगा। सारे राष्ट्रीय पारटियों के लक्ष्य भी वही हैं। आनेवाली पंचायती चुनाव में भायदा उढाने की एक पहली कदम होगा यह कारवाई।
ऐसे अवस्था में तैय्यारी क्यों करना पडा जरा सोचने की बात हैं। श्री मनमोहन सिंह के इरादे की कारण शशी थरूर तिरुवनन्तपुरम लोकसभा चुनाव में एक लाख तक वोटें ज्यादा पाकर सबको हराण करदी थी। इतना ज्यादा मत वर्गीयता और पार्टी के अतीत सोचने वाले जनता के निर्णय का परिणाम हैं। कोणग्रस और अन्य पार्टी के लोगों को यह वात हजम होनेवाला नहीं था। उसका सपूत हम कई बार देख चुके हैं। थरूर नायर नहीं हैं करके एन.एस.एस के जनरल सेक्रटरी नारायण पणिक्कर बोलने का कोई असर मत में दिखाई नहीं दी।
कई सालों से सैबर सेल में सिन्धू जोय (सी.पी.एम), पिणराई (सी.पी.एम) और नारायण पणिक्कर के शिकायत के सिवा और क्या असर हम को दिखाई दी? इसका जवाब दस रुपये का कोर्ट फी स्टांप छिपाकर सैबर सेल के पब्लिक इनफरमेषन ओफीसर को समर्पित करके यह बात के पता करना चाहिये।
घृणा फैलाने वाले वक्तव्य: हम ब्लॉगर का उपयोग आपके विचारों की अभिव्यक्ति के लिए करना चाहते हैं, भले ही वह अत्यधिक विवादास्पद क्यों न हो. परंतु, घृणा फैलाने वाले वक्तव्य प्रकाशित करके इस सीमा को पार न करें. इससे हमारा तात्पर्य ऐसी सामग्री से है जो वंश, नस्ल, धर्म, अक्षमता, लिंग, आयु, वरिष्ठता की स्थिति या यौन रुझान/लैंगिक पहचान के आधार पर घृणा या हिंसा फैलाती है. उदाहरण के लिए, ब्लॉग में ऐसा न लिखें कि X नस्ल वाले लोग अपराधी हैं या वे Y धर्म का पालन करने वालों के प्रति हिंसा का समर्थन करते हैं.
गूगिल और ब्लोगर के बीच कुच्छ भी छुपा नहीं हैं। लेकिन अंजान ब्लोगर को पकडने केलिये भारत सरक्कार तथा राज्य सरकार को गूगिल के सहारा लेना पडता हैं। ऐसे अवस्था में गूगिल के नियमो के पालन कैसे होगा
सही उपयोग. आप यह स्वीकार करते हैं कि इस सेवा का अपने लिए उपयोग करने, आपके किसी भी संदेश, और उनके परिणामों के लिए आप स्वयं ज़िम्मेदार हैं. आप यह स्वीकार करते हैं कि आप इस सेवा का उपयोग आपके देश से निर्यातित तकनीकी डेटा के प्रेषण संबंधी किसी भी कानून और अमेरिकी निर्यात नियंत्रण कानूनों समेत विद्यमान सभी स्थानीय, प्रादेशिक, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय कानूनों, नियमों और विनियमनों के अनुसार करेंगे
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What is the quality of Lalit Modi in front of Hon. Minister Dr. Tharoor?
Allegations Against Modi* He operated as a ‘Super Chief Minister’ from the opulent Rambagh Palace Hotel
* Used his proximity to then CM Vasundhararaje to control key civil servants who would take files to his hotel suite
* Facilitated entry of big builders in the state. Every big land deal had to have his clearance.
* Influenced change in the liquor policy which led to the proliferation of liquor outlets. Became an election issue.
* Had a finger in every pie, including mines
* Personally acquired havelis in Amer by bending the law
* Has an extravagant lifestyle, owns a private jet. Would stay for days in the luxury suite of the Rambagh Palace Hotel.
* Influenced the enactment of the Rajasthan Sports Act to gain control over the Rajasthan Cricket Association (RCA)
* Accused of forging signature to become a member of the RCA
* Rode roughshod over anyone who crossed his path, whether it was a constable or an IPS officer. A slapping incident sparked a near-revolt in the Jaipur police.
* Was named in an FIR for misappropriation of RCA funds. The money has subsequently been deposited with the RCA.
* Convicted in the United States for possession of drugs and kidnapping in 1985
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Shashi Tharoor’s return to India after a distinguished and celebrated career
When I turned on the television, when I refreshed my twitter or when I checked my BlackBerry Messenger, only one question seemed pertinent; do these people truly know Shashi Tharoor?Over the months gone by, the Indian Union Minister of State for External Affairs, Dr. Shashi Tharoor has been repeatedly in the public eye, but hardly ever about his accomplishments and undertakings or his unrelenting efforts at building relations with foreign countries. If I defend him, it will appear partial and if I cringe at the horrendous allegations against him, it will be alleged that my judgement is clouded. Therefore, allow me to take you on a short journey as we delve into the life of Shashi Tharoor. It will allow you to decide who he really is.
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The people of Trivandrum Parliment Constituency elected him as an MP.
Total Voters : 11,18,086
Total Poll : 7,34,924
Shashi Tharoor got : 326725 (Margin : 99998)
Adv. Ramachandran Nair got : 226727
Dr. Neelalohithdasan Nadar : 86233
P.K. Krishnadas : 84094
Did you think about how Dr. Tharoor got a good Margin?
* He conducted the election and met expences from his pocket
* His pomise after election he will be the representative of the entire people of Trivandrum beyond party politics (which he can’t maintain)
* His promis to allot a person who is non-politician at each assembly constotuency to hear the complaints of the public (Congress can’t permit)
* His promis for High Court Bench (he worked for this at his level best)
* His promis on Vizhinjam Port (State Govt. didn’t submited this to Central Govt. But by bringing Barzilona Team for further to do it)
* His stand against HARTHAL and BANDH which is against the development of the Constituency, State and for the Nation.
* His promis to build Trivandrum to International level (Twin City with Barzilona Failed due to the non co-operation of State Govt and Trivandrum Corporation)
* His knowledge in English and Hindi was capable to act an MP in the Parliment
* His tweets and site accesible to the public or to interact (non of the MP can’t do like this)
You can read more about the promises of Dr. Tharoor in Malayalam has so far maid, HERE >>>
The direct recruitment as MP above politics with the support of PM Manmohan Singh and Party Chief Sonia Gandhi. This is a reason of jelousy of few senior leaders. Left parties know that they lost Trivandrum Constituency for ever due to Dr. Tharoor. BJP had a highest Vote Bank in Kerala is Trivandrum which is going down. Thus they are against Dr. Tharoor. The educated people of Trivandrum will be always with Dr. Tharoor beyond party politics to get a mejority at any level or any party he is conducting. IPL Kochi got by the interest and initiative of Dr. Tharoor. -
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एक किसान द्वारा टिप्पणियां: आबोह्वा बदलाव, जल, वायु, सूर्यकिरण आदी की लभ्यता और कम बारिश रबड़ के उत्पादन के लिए अनुकूल होता है। आवधिक (periodical) बारिश से zylem पानी और न्यूट्रियन्ट सहित सजीव रहते हैं और पत्तों पर संश्लेषण की तेजी होगा। अधिक बरसात, सर्दियों के मौसम आदी के समय ज्यादा उत्पादन होगा। लेकिन न्यूट्रियन्ट के नष्ट होना पेडकेलिये हानिकार होगा। कम बरसात इस प्रकार सूखी रबर सामग्री अधिक संभालता हैं और दोहन दिन बढ़ाया जा सकता है। एक comparitative Study एक किसान द्वारा किए गए हैं। उस में अध्ययन वर्ष 2009-10 के लिए उत्पादन वृद्धि दर्शाता प्राप्त है। अप्रैल 2010 के 20 वीं तारिख के बाद ही अनुमानित आंकड़े रबड़ बोर्ड द्वारा की जाने वाले गणना की नतीजा पा सकती है। मीडिया के प्रसारित खबर किसी भी वास्तविकता के साथ सही नहीं है। उच्च कीमतों के कारण दोहन (tapping days) दिन बडेगा और उत्पादन पर वृद्धि होगा। हालांकि भारतीय रबर बोर्ड ने वर्ष 2009-10 के लिए आंकड़े प्रकाशित वास्तविक उत्पादन की तुलना में दूर रहकर कम प्रसारित की हैं। रबड़ बोर्ड द्वारा पिछले साल के प्रचार के लिए Ethephon के आवेदन के साथ दोहन आवृत्ति कम करके उत्पादन बढ़ाने के लिए किया गया था। इस का परिणाम क्या हुआ?
रबड् और किसी अन्य खेतियों जैसे नहीं है। आराम देने पर क्षमता बडता हैं और ज्यादा दोहन से क्षमता कम होजाता हैं। इसे ठीक पालन पोषण देने पर कई साल आमदनी मिलेगा। सर्दियों के बाद पत्ते इकटा गिरता और गर्मियों में ताजा पत्ते होने का कारण संश्लेषण के मदद से cabohydrates का उत्पादन जारी रहता हैं। उसी वजह से किसी उत्तेजित एथिफोण जैसे वस्तू के इस्तेमाल के बगैर दोहन करने पर कोई नुक्सान नहीं होगा। बरसात शुरू होते ही गाडे लाटक्स मिलना शुरू होता भी हैं।
दुनियाँ रबर उत्पादन और खपत का एक समग्र प्रदर्शन मामूली उतार चढ़ाव के साथ वृद्धि हुई है। लेकिन एक बड़े पैमाने पर अस्थिरता कीमतों पर दिख रहा है। ग्रेड के बीच की पैसे की अंतर, कम और उच्च मूल्य की कीमतों में एक सा ही हैं। इस प्रकार जब कीमतें नीचे आता है प्रतिकूल प्रभाव किसानों को अधिक होता हैं।
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वर्ष 2009-10 में उत्पादन घटा
देश में प्राकृतिक रबर के उत्पादन में 2009-10 के दौरान 3.8 प्रतिशत की गिरावट आई है।
कुल उत्पादन पिछले वित्त वर्ष के 8,64,500 टन से घटकर 8,31,400 टन रह गया है। वहीं रबर की खपत में 6.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है और यह 8,71,720 टन से बढ़कर 9,30,565 टन हो गया है। इससे पिछले 3-4 साल से इस जिंस की मांग आपूर्ति के बीच में अंतर बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।
रबर बोर्ड के मुताबिक 2009-10 के दौरान पिछले साल की तुलना में रबर की खपत में बढ़ोतरी की प्रमुख वजह टायर क्षेत्र से बढ़ी हुई मांग है। सीएट, जेके और ब्रिजस्टोन टायर ने उत्पादन क्षमता में विस्तार किया है। साथ ही बिड़ला, अपोलो और टीवीएस श्रीचक्र टायर ने नए संयंत्र स्थापित किए हैं।
बोर्ड का यह भी मानना है कि चालू वित्त वर्ष में भी यही स्थिति बनी रहेगी, जिससे रबर की मांग और आपूर्ति के बीच अंतर और बढ़ेगा। बोर्ड के आरंभिक अनुमानों के मुताबिक देश में 31 मार्च तक रबर का कुल स्टॉक 2,48,000 टन था, जबकि पिछले साल की समान अवधि में रबर का स्टॉक 1,96,230 (सही संख्या ऊपर चित्र में देख सकते हैं।) टन था। लेकिन बोर्ड के यह आंकड़े स्थानीय बाजार की धारणा से मेल नहीं खाते।
आभार – बिजनेस स्टैंडर्ड
आँकडे की विश्लेषण स्प्रेडषीटों पर
इन स्प्रेडषीटों पर प्रसारित आँकडे की विश्लेषण और कहीं नहीं मिलेगा।




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