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मीडिया के पक्षपात केलिये जवाब
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स्वाभाविक रबड् 2008-09 2009-10 +/- अंतर किसान के बेचा 58100 टण
69955 टण
11855 टण
निर्माताओं ने खरीदा 52309 टण 64934 टण 12625 टण उपभोग 70025 टण 73470 टण 3445 टण आयात 4391 टण 10421 टण 6030 टण बचत भंडार 156220 टण 187930 टण 31710 टण मय
स्वाभाविक रबड् 2008-09 2009-10 +/- अंतर किसान के बेचा 60145 टण
51365 टण
-8780 टण
निर्माताओं ने खरीदा 62090 टण 54467 टण -7623 टण निर्माताओं ने खरीदा 71215 टण 71250 टण 35 टण आयात 9950 टण 19828 टण 9878 टण बचत भंडार 149390 टण 189960 टण 40570 टण निर्मातओं के खरीद = (उपभोग + बचत भंडार) – (शुरू की बचत + आयात)
किसेन के बेच = (शुरू की बचत भंडार + उतपादन) – किसान के पास महीने की आखिर में भंडार.
अधिक उतपादन के समय मानकर 2008 अक्टोबर से लेकर 2009 जनवरी तक के उत्पादन और किसानों के पास महीने आखिर के भंडार ज्यादा बडा आँकडे दिखाकर 2008-09 वर्ष के आखिर में किसानों के पास 95925 टण भंडार दिखाकर कुल बंडार 200015 टण करके प्रसारित की। इस के अलावा हेराफेरी -5496 टण का भी हैं। ऐसे हेराफेरी को सही स्थापित करने केलिये 2009 एप्रिल में रबड के उत्पादन कम करके प्रसारित करनेवाला रबड् बोर्ड उसके बाद के आँकडे अबतक प्रसारित नहीं की हैं। ऐसे स्थिती में माध्यम कैसे जूलै तक के आँकडे प्रसारित की? हर एक ने रबड् बोर्ड को जूलै के हिसाब समर्पित करने का समय अगस्ट 20 से पहले हैं। उउन किसाबों को जोडने केलिये और समय लगेगा। ऐसे हिसाब जो पहले से तैय्यार करके माध्यम में प्रसारित करके रबड् बोर्ड के इरादे जनता के सामने ला रहे हैं। और एक जानकारी पुराने रबड् पेड बदनकर नया एस्टेट ज्यादा हुआ। लेकिन ऐसे स्थितिमें ताजे पेडों में टापिंग शुरू भी होता हैं। टाप करने वाला इलाका कितना करके तीन साल बाद ही प्रसारित होगा। 2009 एप्रिल से लेकर अंतरराष्ट्रीय दाम से देशीय दाम ऊचा रहा तो एप्रिल में 724 टण और मय में 116 टण के निर्यात कैसे हुआ?
उत्पादन में पिझले साल से कम हुआ तो उसका जिम्मेदार रबड् बोर्ड ही हैं। उसका करण पेडों मे ‘एथिफोण’ (Ethephon) के इस्तेमाल ही हैं। दाम के बारे में देखने पर पिझले साल आरएसएस 4 केलिये 2008 अगस्ट 28 को 142 रु. प्रति किलो थे और सितंबर 15 को 140 रु. प्रति किलो थे। रबर बोर्ड् के प्रसारित आँकडे खालि किसानों खिलाफ नहीं निर्माताओं के भी खिलाफ हैं।
क्या आप सोच सकते हैं डेड महीने का रबड् भंडार किसानों के पास होगा? जब कि 85% च्छोटे किसान हैं।
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