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साफ राजनीति केलिये ट्विट्टर और डो. शशी थरूर
7 CommentsIf you are using Twitter and Firefox then you can follow Dr. Shashi Tharoor with quick time updates which a MP can do for transparency of his service.

]भारत में ऐसे कितने एम.पी होगा जो जीतने के बाद जनता से मिलाप रखते हैं? हो सकता है सिर्फ एक व्यक्ती शशी थरूर होगा। ए.ऐ.सी.सी, के.पी.सी.सी और प्रादेशिक संविधान एम.पी और मन्त्रियों को कार्य निर्वहण केलियो मदद करनेवाला होना चाहिये। बल्की केरल जैसे देश में कार्य निरवहण पार्टी सेक्रटेरियट और पोलिटब्यूरो के नियंत्रण में हैं। उसकी परिणाम हम 2009 के मतदान से प्राप्त की गई नतीजे से मालूम कर सकते हैं। कुच्छ लोगों के निर्णय आम जनता के खिलाफ होने का सपूत था पार्टी के बीच के अंत्रोणी झगडे, जनता दल जैसे पार्टी शुरू से उनके साथ थे उनको बाहर धकेलना, धर्मनिरपेक्ष बोलकर पि.डि.पी को प्रचारण के सदस्य बनाना, लावलिन हेराफेरी से पिणराइ विजयन को बचाने केलिये अडवकेट जनरल के मदद लेना आदी इस चुनाव में यू.पी.ए को गुणदायक बन गया। जनता या जाती, मत तथा कक्षि राष्ट्रीयता से मुक्त मतदाताओं को खिलाफ बनाने का पूरा जिम्मेदारी पिणराइ विजयन का ही हैं।
तिरुवनन्तपुरम के उमीदवार डो शशी थरूर और उसे मौका देने केलिये कोण्ग्रस के नेतृत्व के निर्णय एक लाख तक के ज्यादा मतदान हासिल करके एक बडिया कमाल करके दिखाया। चुनाव के सारे खर्चे थरूर के कमाई से ही किया। उनके ऐसे जीत के प्रधान कारण उन्होंने जो महत्वपूर्ण वादा जनता के सामने रखा था इसलिये हैँ। शुरी से उन्होंने यह बताया कि वे एक विभिन्न स्वभाव के एम.पी होगा और जीतने के बाद जनता से मिलाप रखूँगा मलयालम लिखने नहीं आता तो भी समझ सकते हैं और उन बातों को आंग्रेजी और हिन्दी में दिल्ली में समर्पित करूँगा। शुरू में ही उन्होंने जो मतदाताओं को उमीदवार के पहचान करानेवाला पोस्टर और बानर लगाया हुआ था उनको निकालकर एक साफ शहर कायम रखने का काम में शामिल हुये। साथ ही आम जनता से संपर्क रखने केलिये संविधान के रूप का निर्माम खोषित की जो पार्टियों से मुक्त व्यक्ती हर दिन दो खंडे का अवसर प्रदान करूँगा। नेट में दुनिया के किसी भी कोने से उनको ट्विट्टर में सन्देश प्राप्त कर सकते है उनके पीछे करने पर। इसी को जनहित बोल सकते हैं। भारत में ऐसे कितने नेता होंगे अधिकार प्राप्त होने के बाद आम जनता से मिलाप रखना चाहते हैं?
आजतक जो अधिकार संभाले लोगों में अधिक लोग हेराभेरी में शामिल थे। राहुल गान्धी जैसे युव और सीथे साथे व्यक्ती मंत्री के पद संभालना भी एक शुभ सूचना हैं। भारत केलिये कामकरनेवाला एक सामूहिक नेटवर्क इन्डी पेपल में थरूर के हाजरी उन्हें और महत्वपूर्ण बना रहे हैं। डो. थरूर के ब्लोग पढने और अभिप्राय लिखनेका अवसर भी प्राप्त हैं। सारे भारत के बारे में विशाल जानकारी भी वह सैट दे रहे हैं।
झीतने के बाद हर एम.पी उस प्रदेस के पूरे जनता के प्रतिनिधित्व करनेवाला बनजाता हैं। उसे काम में लाने केलिये जनता से मिलाप रखने का संविधान किसी स्वतंत्र व्यक्ती के जरीये होना चाहिये। शशी थरूर के तरफ से ऐसे ही वादा को काम में लाने की कोशिश देख सकते हैं। इस चुनाव से पहले थरूर के एन.आर.ऐ दोस्त के जरीये मुलाकात करने केलिये हम तिरुवनन्तपुरम के कुच्छ ब्लोगर उन के खर पहूँचे थे। लेकि एक नेता वहाँ जो मौजूद थे उन्होंने मुलाकात का मौका देने से इनकार किया और हम को आदेश दी तम्पानूर रवी के जरिये ही आना चाहिये। लेकिन थरूर ने हमें मुलाकात के कुच्छ वक्त जरूर दी। इस का साफ मतलब यह था सारे नियंत्रण इन च्छोटे नेताओं के हाथ में निरभर थे। उन्हें मालूम नहीं होगा जो थरूर को एक लाख तक मत ज्यादा मिला स्वतंत्र मतदाताओं से ही हैं।
जो व्यक्तिगत नहीं और आम जनता केलिये गुण पानेवाला समस्याओं को एम.पी के पास पहूँचाने के बीच इन चमलों के धकेल से सावधान रहना होगा। ऐसे गलत तरीके का मुक्ती डो. थरूर के पास होगा तो उससे अच्छा और कौन सा बात हो सकते हैं आम जनता केलिये।
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7 Responses to “साफ राजनीति केलिये ट्विट्टर और डो. शशी थरूर”
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manu said on 18 May 2009 at 1:25 PM
റബറിന്റെ രക്ഷക്ക് ഫാര്മറും ബ്ലോഗും എന്നതുപോലെ
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anoopambalapuzha said on 18 May 2009 at 5:06 PM
ലോകത്തെവിടെയിരുന്നും ട്വിറ്ററില് അദ്ദേഹത്തെ പിന്തുടരുന്നതിലൂടെ സന്ദേശങ്ങള് കൈപ്പറ്റാവുന്നതാണ്. ഇതിനെയാണ് സുതാര്യത എന്ന് പറയുന്നത് . aano?
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friend said on 19 May 2009 at 7:22 PM
അങ്ങേര് സുതാര്യമായിട്ട് വല്ലതും പറഞ്ഞാലല്ലേ (ബെറിച്ചാല്) നമ്മക്ക് വായിക്കാന് പറ്റൂ?
ഇതൊരുമാതിരി ആരാധനമൂത്ത പ്രകടനമായിപ്പോയി ഫാര്മറണ്ണാ. -
keralafarmer said on 20 May 2009 at 5:03 AM
സുഹൃത്തേ,
മറ്റുള്ളവര് പാര്ട്ടിയെമാത്രം ആരാധിച്ച് ജനത്തെ മറക്കുന്നവര് എന്നതല്ലെ ശരി? താനെന്തു ചെയ്തു എന്ന് പറയുന്ന എത്ര എം.പിമാരെ കാണാന് കഴിയും. നൂറു ശതമാനവും ഞാനൊരു തരൂരിന്റെ ആരാധകനല്ല. പക്ഷെ ഡോ. തരൂര് ചെയ്യുന്ന നല്ല കാര്യങ്ങളെ പിന്തുണക്കും. അത്രേ ഉള്ളു. എന്നുവെച്ച് കോണ്ഗ്രസ്സില് ചേരാനൊന്നും എനിക്ക് താല്പര്യവും ഇല്ല. ഒരു ഇന്ത്യന് പൌരന് അത്രതന്നെ. -
ഉപ്പായി മാപ്ല said on 21 May 2009 at 2:22 PM
“നഗരമലിനീകരണത്തിന് കാരണമാകുന്ന പോസ്റ്ററുകള് നീക്കം ചെയ്തുകൊണ്ട് തിരുവനന്തപുരത്തെ അന്താരാഷ്ട്ര നിലവാരത്തിലേയ്ക്ക് ഉയര്ത്തുവാനുള്ള ഒരെളിയ ശ്രമത്തിന് അഭിനന്ദനങ്ങള് അര്ഹിക്കുന്നു. ”
പോസ്റ്ററുകള് മാറ്റുമ്പോള് തരൂരിന്റെ വളിച്ച മോന്ത ഒട്ടിച്ചവ ആദ്യം മാറ്റുമല്ലാ? -
someone said on 25 May 2009 at 2:43 PM
അണ്ണാ, ഉച്ചക്കട മൊതല് വെട്ടുകാട് വരെ പെയ്യൂടണ റ്വാഡില് ത്യാരി ഫാഗത്ത് കാണണ ചള്ളയെല്ലാം ഒന്നു നെരത്താന് യെമ്പി ഫണ്ടീന്ന് വല്ലോം കേക്കാനെക്കൊണ്ട് ഇപ്പ ട്യൂറ്റര് വഴി അപേഷിക്കണവെന്ന് ക്യാട്ടല്ല്. ഈ ട്യൂറ്റര് എന്ന് പറയണത് ടേപ്പ് റെക്കാര്ഡറിനെ സ്പീക്കറിനകത്തൊള്ള സാതനവല്ലീ? ഇതീക്കൊടെ എങ്ങനെ അപേക്ഷിക്കണത്? ഇഞ്ഞി റിക്കോര്ഡ് ചെയ്ത് കാസറ്റ് അയക്കാനാന് വല്ലോം ആന്നോണ്ണാ പുതിയ യെമ്പീ സാറു പറയണത്?
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keralafarmer said on 25 May 2009 at 3:20 PM
Somenone,
ഇത് കോട്ടയത്തൂന്നുള്ള കമെന്റാണെന്ന് കാണുന്നു. അങ്ങിനൊരാള്ക്ക് ഉച്ചക്കടയും വെട്ടുകാടുമായി എന്തു ബന്ധം?



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