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रबड् किसानों ध्यान रखना

स्वाभाविक रबड् के दाम गिराने की कोशिश कई महीने से चालू हैं। उसके परिणाम सेप्टंबर के पहले हफते में 140 रु. प्रति किलो की दाम आर.एस.एस 4 को मिला और महीने की आखिर में हर एक दिन चार या पाँच रु. के हिसाब से गिराकर 113 रु. पर पहूँचा दी। उस दौराण अन्तरराष्ट्रीय दाम में ऐसे ऊँच नीचा हुआ ही नहीं। 2008 एप्रिल पहली तारिख को निरमाताओं के पास 78635 टण बचत थे और जूण 30 तारिख को 54445 टण हो गया। ऐसे कमी होने से आनेवाले महीनों में 12000 टण तक पहूँचाने की संभावना हैं। कारण यह हैं बाजार में ज्यादा रबड् होने का कारण कभी भी खरीद सकते हैं। एप्रिल एक तारिख को सिन्तेटिक रबड् 26225 टण था वह जूण 30 तारिख को 36335 टण करके बडगया। स्वाभाविक रबड के बदले में कुच्छ सीमा तक सिन्तेटिक रबड् इस्तेमाल कर सकते हैं। एप्रिल से जूण तक किसानों ने 183935 टण बेचा तो निरमाताओं ने सिरफ169821 टण ही खरीदा हैं। उस दौराण देशी दाम अन्तरराष्ट्रीय दाम से कम होते हुये भी आयात  21289 टण का हुआ। निर्यात की गई 15208 टण से कितना वापस आया कौन जनता हैं? आगस्ट 13 तारिख को अन्तरराष्ट्रीय दाम आर.एस.एस 3 के 124.54 रु. प्रति किलो था तब देशीय दाम 15.46 रुपये के ऊँचाइ पर आर.एस.एस 4 को 140 रु. की स्थिरता दिखाकर उस महीना पूरा कायम रखा। क्यों कि ज्यादा से ज्यादा बचत भण्डार संभालकर किसानों से अधिक रबड इकटा की। आगस्ट महीने में उसी वजह से कियानों के पास भण्डार कम होगा तो भी रबड् बोर्ड आँकडे मे ज्यादा ही दिखायेगा। उसी के साथ आनेवाले महीनों में अच्छा मौसम के कारण (ठंडा मौसम नवंबर से जनुवरी तक) ज्यादा उत्पादन से अधिक रबड् होने का कारण रबड् बोर्ड निर्यात केलिये प्रोत्साहन देगा। भारत से होनेवाला कम दाम की निर्यात के बारे में आटो टयर मानुफाकचरर असोसियेषन (ATMA) भी चुप  रहेगा। उसका कारण अंतरराष्ट्रीय दाम गिरा सकते हैं करके ही हैं।
जूलै दो तारिख को एकणोमिक्स टैंस और उसके साथ फिनानष्यल एक्सप्रस आदि सैटों में  रबड बोर्ड के एक सीनियर ऒफिष्यल अपने नाम झुपाते हुये जूण 30 तक के उत्पादन (कई रबड् षीट कच्चा होगा) 62000 टण है और उपभोग 72000 टण है करके बता दिया। व्यापारि और क्रंप या गाडे लाटेक्स बनाने वाले, निरमाताओं आदि रबड् बोर्ड को जूलै 20 तक ही लिखित रूप में हिसाब देगा। ऐसे वक्त पर रबड् बोर्ड के उस कर्मचारी जो आँकडे दी उनको मानना पडेगा।  लेकिन जूण 30 तक के हिसाब ऒक्टोबर में जब प्रसारित हुआ तो अधिक अंतर नहीं था। उतपादन 62200 टण और उपभोग 74060 टण हैं करके 90 दिनों के बाद प्रसारिक किया। ऐसे pre planed रबड् के आँकडे किसानों के खिलाफ हैं।
इस अवसर पर किसान अपने दिल और दिमाग का इस्तेमाल करना चाहिये। किसानों के तरफ से निर्यात का अवसर नहीं पैदा करना। निर्यात चाहनेवाले लोग political parties के हैं। क्यों कि उनके को-ओपरेटीव सोसैटि(Rubber Co-operative Societies) ही राज्य सरकार से मदद पाकर निर्यात करते हैं। बदले में किसानों को यह नीचे दिये कार्य करना चाहिये।
1. जिस पेड पर उत्पादन कम हैं, जिसके पत्ते कम हैं, जिसके लकडी पतला हैं वैसे पेडों को आराम देना चाहिये।
2. जो पिझले महीनों में बेचा उसी हिसाब से बेचना चाहिये।
3. जो बचत होगा वह अच्छी तरह सुखाकर संभालकर रखना हैं।
4. अंतरराष्ट्रीय दाम तक के दाम मिलने केलिये बाजार में कदम रखना।
5. बडे व्यापारि और निरमाताओं मिलकर जो खेल खेल रहे हैं वह समझना जरूरि हैं।
6. जब रबड् की दाम गिरता हैं तब आँसू बहाने वाले टयर निरमाता के मलयालम समाचार पत्र पर विश्वास मत करो।
आदि हैं।

1 comment to रबड् किसानों ध्यान रखना

  • Livemint.com says that the production increased up to September as 3.93 Lakh Tonnes and consumption rose up to 4.44 Lakh Tonnes which had been published by a senior Rubber Board official told PTI. Is it possible to publish all these statistical details with in seven days? Actually the growth in production increased by the rate from 23 rd August to 12 September above International to collect maximum from farmers. From the figures available on production and consumption shows that there no excess stock in the market. But the price went down fro 140 rupees to 101 rupees a kg with in few days. How it happened? It happened due to the joint venture of bulk dealers and manufacturers in India. The Dealers price (vyaparivila) publishing in Malayalamanorama is one more ingredient to reduce price which is not available in any official records.
    The

    heavy fall in natural rubber prices says Businesstandard. But htese media don’t know about the higher prices from 23rd August to September 12. Rubber prices reach Rs 100 levelIt is the heavy drop in crude oil price and the US and European economic slowdown that created panic in the rubber mart the world over. There are reports from the US that the sale of automobiles would drop by 30 per cent.
    Economictimes says that “Consumption rose due to an increase in the production and export of vehicle tyres,” a senior Rubber Board official told media.