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आज से रबड् की दाम जो प्रमुख क्षेत्रों से प्राप्त हैं उसे इकटा करके यहाँ प्रसारित कर रहा हूँ। कुच्छ साल पहले मलेष्या सबसे ज्यादा उत्पादक थे तब कोलालंपूर दाम अंतरराष्ट्रीय माना जाता था। उसके बाद तायलान्ट सबसे बडा उत्पादक बने और बान्कोक दाम अंतरराष्ट्रीय बन चुके थे। लेकिन अब सिन्गप्पूर दाम अंतरराष्ट्रीय माना जा रहा हैं। बान्कोक से कम दाम होने का कारण हो सकता हैं सिन्गप्पूर दाम अंतरराष्ट्रीय बनने योग्य होगया। भारत में 92% केरल के उत्पादन हैं। यहाँ के डीलरों को नियन्त्रित करने केलिये जो व्यापारि दाम मलयालमनोरमा दैनिक समाचार पत्र में छापकर अगला दिन दाम कम हो या ऊँचा हो च्छोटे व्यापारि को नुक्सान होते बगैर इकटा करके बडे व्यापारि के पास पहूँचाता हैं। बडे व्यापारि और कुच्छ बडे निरमाता मिलजाने पर क्या क्या हो सकता हैं वह सब कुच्छ यहाँ होते जा रहे हैं। अब जो हैं देशी आरएसएस 4 के दाम अंतरराष्ट्रीय आरएसएस 3 से 20 रु. ऊपर हैं। अब किसानों के पास कम स्टोक और उत्पादन भी कम हैं। कुच्छ दिनों बाद आयात के कारण यहाँ बडे व्यापारियों के पास स्टोक ज्यादा होने का कारण निर्यात केलिये हंगामा मचायेंगे। वे सब कोपरेटीव सोसैटी जो राष्ट्रीय पार्टियों के प्रतिनिधि चला रहे हैं। ग्रेड षीट के अलग अलग नमूने हर ग्रेड के पहचान केलिये ग्रीन बुक हर डीलर किसानोंं को दूकानों में दिखाने योग्य प्रदरशित करना चाहिये। लेकि रबड् बोर्ड लैसनस फी लेकर व्यापारि को ग्रीन बुक के नमूना नहीं देता जो रबड् आक्ट के खिलाफ हैं।

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