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ग्लोबल उत्पादन घटने से रबड़ हुआ मजबूत

कोच्चि: पिछले कुछ महीनों से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्पादन में कमी आने और

आयात के लगातार बढ़ने के बावजूद प्राकृतिक रबड़ की कीमतें आकर्षक स्तर पर बनी हुई हैं। अगर अप्रैल से अगस्त 2009 की बात करें तो टायर कंपनियों की ओर से रबड़ का आयात 228 फीसदी बढ़कर 80,000 टन के करीब पहुंच गया है। पिछले साल की इसी अवधि में यह आयात करीब 24,264 टन पर था। प्राकृतिक रबड़ का स्टॉक भी इस अवधि में 1.8 लाख टन रहा है जो पिछले साल 1.2 टन पर था। इस अवधि में निर्यात में आई कमी की वजह से भी देश में रबड़ के स्टॉक में वृद्धि दर्ज की गई है।

दिलचस्प तथ्य यह है कि आयात में हुई वृद्धि और देश में रबड़ का स्टॉक बढ़ने के बावजूद इसकी कीमतों में कमी नहीं दर्ज की गई है। पिछले एक महीने से करीब 98-99 रुपए प्रति किलो रहने के बाद पहली अगस्त को रबड़ की कीमत 100 रुपए पर पहुंच गई।जून 2009 में समाप्त साल के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रबड़ के उत्पादन में 4.5 फीसदी की कमी दर्ज की गई है। यह कमी साल 1952 के बाद सबसे अधिक बताई जा रही है।

प्राकृतिक रबड़ उत्पादक देशों के संगठन के अनुसार थाईलैंड में साल के पहले पांच महीने में उत्पादन में 18 फीसदी कमी दर्ज की गई है, जबकि इंडोनेशिया में उत्पादन में छह फीसदी कमी आई है। इसके अलावा मलेशिया में इसी अवधि में रबड़ के उत्पादन में 25 फीसदी कमी दर्ज की गई है। अधिकतर देशों में रबड़ के पौधे दोबारा लगाए जाने की प्रक्रिया की वजह से इसके उत्पादन में कमी दर्ज की गई है। भारत में पिछले साल की तुलना में इस साल अप्रैल-जून में रबड़ के उत्पादन में 13 फीसदी कमी आई है। दूसरी तरफ देश में रबड़ की खपत में वृद्धि दर्ज की गई है। अप्रैल में रबड़ की खपत 73,470 टन हुई, जबकि जून में यह बढ़कर 73,500 टन और जुलाई में 78,000 टन पर पहुंच गई।

आभार – इकनॉमिक टाइम्स

माध्यम के सहायता से रबड् बोर्ड के हेराफेरी को जनता के नजर में नहीं आने देता हैं। इसका सपूत अगले पोस्ट में प्रसारित करूँगा।

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