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रबड् भंडार आँकडे सन. 2008-09 साल के

किसानों के पास असलियत से ज्यादा रबड् भंडार दिखाकर और व्यापारि, प्रोसस्सर के आँकडे में हेराफेरी दिखाकर रबड् बोरड् आँकडे में किसानों के खिलाफ प्रसारित कर रहे हैं। पिझले महीनों में व्यापारी और प्रोसस्सर भंडार बडाकर रखा हुआ भी हैं। इसके सपूत आँकडे में देख सकते हैं। 2008 आगस्ट सितंबर महीनों में देशी दाम अंतरराष्ट्रीय दाम से ऊँचा रखकर सितंबर में 12717 टण और अक्टोबर में 15948 टण की आयात की गई। उसी कारण उत्पादन ज्यादा मिलनेवाला नवंबर, दिसंबर में रबड् की दाम बहूत गिरा रखा। पिझले महीनों में इकटा की गई भंडार पर पेकिंग, संभालकर रखने की खर्च, वाट आदी भी लगाकर अंजान निर्माताओं को भारी नुक्सान पहूँचा रहे हैं। कुच्छ बडे निर्माता और बडे व्यापारि आपस में मिलकर यह खेल कर रहा हैं। इन में कई व्यापरि “कोपरेटीव सोसैटी” ही हैं। क्यों कि ज्यादा मुनाफा मिलने पर उसके हिस्सा सरकारी खजाने में जाते हैं। बदले में ऐसे खेल पर उनके खुदका मुनाफा बना सकते हैं। रबड् बोर्ड या किसि अन्य वेब सैट में न होनेवाले कम दाम व्यापारियों केलिये भारत के सबसे बडा निर्माता उन के समाचार पत्र में छापकर किसानों को लूट रहा हैं। अगर आज दाम ज्यादा और कल कम है तो भी आज के ही दाम में इन छोटे व्यापारियों से इकटा कर लेते हैं। उसी वजह से छोटे व्यापारियों के पास भंडार बहूत ही कम होगा।

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